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Premchand Aggarwal Exposed |
Premchand Aggarwal Exposed: उत्तराखंड की राजनीति में हाल ही में प्रेमचंद अग्रवाल विवाद चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान को लेकर विपक्ष और जनता ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
विवाद की शुरुआत ( Premchand Aggarwal Controversy )
विधानसभा सत्र के दौरान प्रेमचंद अग्रवाल के एक कथित बयान ने उत्तराखंड की जनता, खासकर पहाड़ी समुदाय को नाराज कर दिया। सदन में दिए गए उनके शब्दों को लेकर विरोध शुरू हो गया, और विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाते हुए सदन का बहिष्कार किया।
धरना-प्रदर्शन और जनता का आक्रोश
विधानसभा सत्र के तुरंत बाद, राज्य के विभिन्न हिस्सों में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए। जनता और कई राजनीतिक दलों ने मंत्री के बयान की निंदा करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने 'गुंडा मंत्री हाय-हाय' जैसे नारे लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर जमकर बहस छिड़ी हुई है।
सदन में हंगामा
इस विवाद ने विधानसभा सत्र को भी प्रभावित किया। बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने सदन में इस बयान के खिलाफ कड़ा विरोध जताया और सदन का बहिष्कार करते हुए कागज फाड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहाड़ के लोगों के साथ भेदभाव कर रही है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
प्रेमचंद अग्रवाल का बचाव और प्रतिक्रिया
बढ़ते विरोध के बीच, मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। उन्होंने कहा,
"यदि मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से खेद प्रकट करता हूँ। उत्तराखंड मेरा परिवार है और मैं हमेशा इसके विकास के लिए समर्पित रहूंगा।"
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
खानपुर विधायक उमेश कुमार ने सदन में मंत्री से माफी मांगने की अपील की, लेकिन मंत्री ने इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया और मामले को शांत करने का प्रयास किया।
राजनीतिक माहौल और आगे की स्थिति
इस विवाद के कारण उत्तराखंड की राजनीति गर्मा गई है। जनता और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर हैं, जबकि सरकार इसे गलतफहमी बताकर टालने की कोशिश कर रही है। क्या प्रेमचंद अग्रवाल को इस विवाद के चलते इस्तीफा देना पड़ेगा, या सरकार इस संकट को सुलझाने में सफल होगी? यह देखना बाकी है।